泡沫之夏
太空的第一座矿山,会挖什么,太空的第一座矿山,会挖什么_我的网站

一 | जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू संभाग में भारी बारिश से बनी बाढ़ जैसी स्थिति से भले नागरिकों को राहत मिल गई हो परंतु अब बिजली-पानी के लिए हाहाकार मच गया है। बिजली ढांचे को पहुंचे नुकसान की वजह से शहर के अधिकांश क्षेत्र पिछले तीन दिनों से अंधेरे में डूबे हुए हैं। बिजली सप्लाई ठप होने की वजह से जलापूर्ति भी पूरी तरह से प्रभावित होकर रह गई है।,जल शक्ति विभाग व नगर निगम ने हालांकि लोगों को राहत पहुंचाने के लिए प्रभावित इलाकों में टैंकर सप्लाई की व्यवस्था की है परंतु यह अस्थायी प्रबंध भी लोगों की मांग के आगे नाकाफी साबित हो रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सैनिक कालोनी, ग्रेटर कैलाश, त्रिकुटा नगर, गांधी नगर जैसी पाश कालोनियों में भी बिजली-पानी के लिए लोग परेशान हैं। पिछले तीन दिनों से न तो लोगों को नियमित बिजली मिल रही है और न पानी की सप्लाई हो रही है।,यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: एलओसी के पास घुसपैठ की कोशिश नाकाम, सेना की कार्रवाई में दो आतंकी ढेर अधिकारियों का कहना है कि बारिश की वजह से ट्यूबवेल की मुख्य मोटरें व ट्रांसफार्मर जल जाने की वजह से आपूर्ति ठप होकर रह गई है। शहर की पाश कालोनियों की अगर यह स्थिति है तो ग्रामीण इलाकों में बिजली-पानी के लिए किस तरह हाहाकार मचा होगा, आप अंदाजा लगा सकते हैं।,
पेयजल किल्लत सिर चढ़कर बोल रही
आपदा से जूझ रहे जम्मू में पेयजल किल्लत सिर चढ़कर बोल रही है। टैंकरों से भी पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही। न ही निजी टैंकरों से ही पानी मिल पा रहा है। जम्मू का लगभग हर मुहल्ला पानी के लिए त्राहिमाम कर उठा है। शीतली, धौंथली और बोरिया फिल्ट्रेशन प्लांट में सिल्ट आ जाने के कारण जलापूर्ति नहीं हो पाई तो वहीं शहर के अधिकतर ट्यूबवेल भी जलभराव के बाद बंद हो चुके हैं।,तीन दिन से कर रहे पानी का इंतजार
नतीजतन अधिकतर इलाकों में वीरवर को लगातार तीसरे दिन भी जलापूर्ति प्रभावित रही। त्रिकुटा नगर एक्सटेंशन में पिछले तीन दिनों से पानी नहीं होने और जलभराव होने के कारण टंकियों का पानी खराब होने के बाद लोगों को पीने का पानी तो मिल नहीं रहा, नहाने के भी लाले पड़ गए हैं। घरों से मलबा निकालने, पानी में गीले हो चुके सामान को सामन करने में इस पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। पीने के पानी के लिए लोग यहां वहां भटकने को मजबूर हैं। कुछेक लोग पानी का टैंकर तो मंगवा पाए लेकिन अब तो टैंकर भी नहीं मिल रहे।,यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर गुरेज सेक्टर में सेना ने दो आतंकियों को मार गिराया, घुसपैठ की कोशिश नाकामनिजी पेयजल टैंकरों के लिए भी हो रही मारामारी
पाॅश गांधीनगर के भी कई इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। पानी के टैंकरों के लिए लोग अधिकारियों, कर्मचारियों, निजी टैंकर वालों को फाेन लगा तो रहे हैं लेकिन काम बन नहीं रहा। छन्नी हिम्मत, सैनिक कालोनी, जानीपुर, रूपनगर,मुट्ठी, शक्ति नगर, बख्शी नगर, तालाब तिल्लो, भगवती नगर, बाहुफोर्ट, बठिंडी, सुंजवां में भी पानी की आपूर्ति बाधित है। अालम यह है कि लोगों को निजी टैंकरों की सप्लाई भी नहीं मिल रही है।,शीतली से 30 प्रतिशत हो रही पानी की सप्लाई
शितली फिल्ट्रेशन प्लांट की क्षमता 38 मिलियन गैलन प्रतिदिन है। वहीं बोरिया फिल्ट्रेशन प्लांट की क्षमता करीब 60 लाख गैलन प्रतिदिन है। मौजूदा समय में काफी प्रयासों के बाद अभी तक 30 प्रतिशत के करीब आपूर्ति ही सुनिश्चित हो पाई है। बाढ़ के कारण शीतली की सप्लाई लाइन को काफी नुकसान पहुंचा है जिसकी वजह से जलापूर्ति में दिक्कत हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि मरम्मत कार्य शुद्ध स्तर पर जारी है। जल्द सप्लाई व्यवस्था को नियमित कर दिया जाएगा।,यह भी पढ़ें- वैष्णो देवी से बिना दर्शन के लौटने लगे श्रद्धालु, आपदा में अब तक 34 लोगों की मौत; जम्मू डिवीजन में 58 ट्रेनें रदनगर निगम के टैैंकर ही सहारा
जम्मू नगर निगम ने प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से जलापूर्ति शुरू तो की है लेकिन यह नाकाफी साबित हो रही है। नगर निगम के हेल्परलाइन नंबरों पर को वीरवार को 300 से कालें आईं जिन पर 250 से ज्यादा टैंकरों को भेजा गया लेकिन आबादी के हिसाब से टैंकर कम पड़ रहे हैं।,निगम के ज्वाइंट कमिश्नर अब्दुल स्तार का कहना है कि हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि प्रभावित मुहल्लों तक टैंकरो से पर्याप्त पानी पहुंचाया जाए लेकिन इस प्रक्रिया समय लगता है। वहीं जलापूर्ति विभाग फिल्ट्रेशन प्लांटों को साफ करने के साथ मरम्मत कार्याें को तेजी से पूरा कर रहा है ताकि जल्द जलापूर्ति सुचारू की जा सके। विभाग का दावा है कि धीरे-धीरे सभी मुहल्लों में आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। 。
二 | 李 扬 《人民日报》(2026年08月22日 第 06 版) 近来,“一颗小行星价值数万亿美元”等话题屡屡引发关注。如果未来人类真的在太空建起第一座矿山,会最先开采什么?答案或许出人意料:很可能不是昂贵的金属,而是水、氧,甚至是土壤。 谈到太空矿产,人们通常想到的是:地球资源越来越紧张,于是人类飞向月球或小行星开采矿产,再把资源运回地球。

三 | 这种设想并非完全没有道理。

四 | 月球表面部分岩石含有钛、铁,也检测到稀土,不少小行星则含铁、镍和铂族金属等。然而,从“有资源”到“能开采”,再到“值得运回地球”,仍隔着很长的距离。 判断一种资源是否值得开发,要综合考虑矿体规模、品位、赋存状态、开采方式、能源消耗、加工难度以及运输成本等。尤其在太空,开采和运输成本往往决定了一切。既然如此,为什么还要去太空采矿?其实,人类真正需要的,未必是把资源带回地球,而是让资源留在太空发挥作用。 今天,人类开展月球探测和深空探测,几乎所有物资都来自地球:宇航员饮用的水、呼吸所需的氧气,火箭燃料,科研设备……如果只是“打卡式”登陆月球,这种方式尚可维持;但如果要建立长期运行的月球科研站,并以月球作为继续探索火星和深空的基地,仅依靠地球不断补给,将越来越困难。因此,各国航天机构近年来越来越关注一个概念:就地资源利用。 所谓“就地资源利用”,就是尽可能利用月球、火星或小行星当地已有的资源,生产人类所需要的产品,而不是什么都从地球运过去。在这种逻辑下,资源价值的标准发生了变化。在地球,一吨水没有太大经济价值;但在月球,一吨水可能比黄金更加珍贵。

五 | 同样,月壤也不只是普通的尘土。月壤中含有丰富的硅、铁、铝、钛以及与这些元素结合的氧。未来,人们有望利用加热、电解等方法提取月壤中的氧气和金属,并利用剩余材料铺设道路、建设着陆场,甚至作为三维打印建筑材料。

六 | 当然,实现这一目标并不容易。

七 | 月球表面的高真空、剧烈温差、强辐射和低重力环境,都会给资源勘探、开采和加工带来巨大挑战。月球极区究竟储存了多少水冰?如何高效提取氧气?怎样利用月壤制造建筑材料?这些问题仍需要长期研究。

八 | 当前太空资源研究最重要的任务,并不是急于给月球上的矿产标价,而是绘制更加精确的资源地图。近年来,中国嫦娥工程不断取得突破,带回了珍贵的月球样品,为认识月球物质组成、资源分布和形成历史提供了重要依据。未来,随着国际月球科研站等重大工程逐步推进,对月球资源的科学认识将成为深空探测的重要基础。 从石器时代到青铜时代,再到工业时代,人类不断发现新的资源,也重新定义“矿”的含义。今天,当探索的边界从地球延伸到月球和火星,这个古老的概念也正在发生变化。从“地球补给”走向“就地取材”,看似只是采矿地点的变化,实际上意味着人类探索宇宙方式的一次深刻变革。 (作者为北京大学地球与空间科学学院副教授)。

九 |
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Published on:09:48:58
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